11 Aug 2010

Poem

Author: swarnishadswar | Filed under: poem

वन लगाओ धरा बचाओ
धरती को हरा-भरा बनाओ
न नाश करो इस धरा का
न नाश करो पशु- जगत का
वृक्ष लगाओ धरा सजाओ
धरती को हरा- भरा बनाओ
अपना भविष्य आप बचाओ

-तूलिका श्रीवास्तव

11 Aug 2010

Poem

Author: swarnishadswar | Filed under: poem


मैं खड़ा अकेला अनंत

मैं खड़ा अकेला अनंत
ढूँढ रहा जीवन का पथ
साथ नहीं कोई मेरे
खोज करता नित निरंतर
तय करता जीवन का पथ

तूलिका श्रीवास्तव

11 Aug 2010

Geet

Author: swarnishadswar | Filed under: poem

बरसो कारे-कारे मेघा
बिन बरसे मत जा रे मेघा
अपनी शीतल बौछारों से
धरती की सब प्यास बुझा दे

बदरा देख नाचे मोर
पशु -पक्षी सब हुए विभोर
बरसो -बरसो जमकर मेघा
उमड़-घुमड़ बरसो रे मेघा

तूलिका श्रीवास्तव

11 Aug 2010

kavita

Author: swarnishadswar | Filed under: poem

मैं खड़ा अकेला अनंत

मैं खड़ा अकेला अनंत
खोज रहा नित निरंतर
उन चेहरों में कुछ
जो खोए हैं जो भूले हैं
सदियों से जो बिछुड़ चुके हैं
मैं खड़ा अकेला अनंत
खोज रहा नित निरंतर
हर चेहरों को जो
लगते हैं कुछ जाने पहचाने

तूलिका श्रीवास्तव

30 Dec 2009

Quotes

Author: swarnishadswar | Filed under: Music Quotes

प्राचीन अनमोल वचन

सूर्य श्रेष्ठ गुरु है .
गुरु तठस्थ होते हैं इसलिये श्रेष्ठ सलाह गुरु की ही मानी जाती है .
आँखों के डाक्टर अंधेपन का इलाज करते हैं , लेकिन अंतरात्मा की बंद आंखे महान गुरु ही खोल सकता है .
ज्ञान और अनुभव कभी पूर्ण नहीं होता .
शिक्षक सिर्फ सिखाता ही नहीं , बल्कि खुद भी सीखता है .
सब ज्ञानों में आत्मज्ञान श्रेष्ठ है .
ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकता है , मनन से , जो की सर्वोत्कृष्ट है , अनुसरण से  जो  सबसे सरल है  और अनुभव से जो की सबसे कड़वा है .
24 Dec 2009

Maun Ka Rahsya

Author: swarnishadswar | Filed under: Articles

मौन का रहस्य

आर. पी . श्रीवास्तव
मौन का आध्यात्मिक तथा धार्मिक दोनों ही दृष्टियों से महत्त्व  है . मौन अपने आप में बड़ा विलक्षण है . स्वीकृति और अस्वीकृति दोनों में ही यह काम आता है . मौन को अक्सर स्वीकृति सूचक मन जाता है . संस्कृत में उक्ति है ” मौन स्वीकृति सूचनम ” लेकिन जहाँ किसी की बड़ाई हो रही हो , लोग अपनी राय व्यक्त कर रहे हों  वहां आप मौन रह जाइए तब देखिये उसका क्या नतीजा होता है . अरबी लोकोक्ति भी है की मौन के वृक्ष पर ही शांति के फल निकलते हैं . चुप रह कर भी  व्यक्ति बहुत कुछ कह देता है . सामान्य रूप से भी मौन का बहुत महत्व है . मौन रह कर कितने ही झगड़ों का निपटारा किया जा सकता है . गाव की एक कहावत है की एक चुप्पा सैकड़ों को  हरा सकता है .
मौन अभेद्य कवच है जिसे कोई भी भेद नहीं सकता .   यह सुरक्षा का सर्वोत्तम उपाय है . कहा गया है की मौन रहो और अपनी सुरक्षा करो . मौन कभी तुम्हारे साथ विश्वासघात नहीं करेगा . अपनी निद्रा को जा वश में रखता है वह जीवन पर नियंत्रण रखता है  ,किन्तु जिसका जिह्वा पर वश नहीं ,वह नाश को प्राप्त होता है .
दार्शनिकों के लिये मौन और एकांत आत्मा के सर्वोत्तम मित्र हैं . गूढ़ और दार्शनिक रहस्यों का वर्णन मौन रहकर ही किया जा सकता है . इसलिये जब एक बार महात्मा बुद्ध से महासत्य के सम्बन्ध में तीन प्रश्न किये गए तो तीनों बार वे मौन रहे . जब उनसे उत्तर न देने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा -मैं उत्तर दे चुका हूँ . वह महासत्य मौन की तरह वचनातीत है . इसी प्रकार एक फकीर छ: कोस पैदल चल कर कबीर के पास आया . दोनों एक दुसरे का हाथ पकड़कर साडी रात बैठे रहे .दुसरे दिन तृप्त होकर फकीर ने विदा ली . लोगों ने कबीर से पूछा की इतनी दूर से आकर वे चुप क्यों रहे और आप भी कुछ नहीं बोले . कबीर ने कहा की हम लोगों में इतनी अधिक बातें हुई की वे भाषा में समां नहीं सकती थीं . मन के भावों  को यदि मैं मुख की भाषा में अनुवाद करके बोलता तो उसमे विकार आ जाता . फिर उन बातों को जब वे मन की भाषा में अनुवाद करते तो भी विकार आ जाता .  संत जनों की समाधी में जब मन निरंजन से लौ लगाकर थक जाता है तो वाणी मूक हो जाती है . फिर चाहे कोई कितना चिंतन करे उसका अनुभव अपार , अगम्य और इन्द्रियों की पकड़ से परे होता है . जिस प्रकार सागर में मिल जाने पर बूँद तौली नहीं जा सकती ,उसी प्रकार अवरूद्ध वाणी कैसे बोल सकती ? पक्षी की तरह मन बंधन मुक्त होकर निस्सीम गगन में दूर दूर तक उड़ जाता है और विचित्रता यह है की इसका वर्णन नहीं किया जा सकता .
भारतीय संस्कृति में वैसे भी मौन व्रत का विशेष महत्व है . परन्तु इस अमावस्या के दिन मौनव्रत रखना बहुत शुभ और लाभदायी माना जाता  है . इस दिन कल्पवासी साधू संत तो मौनव्रत रह कर इस पर्व को सार्थक सिद्ध करते हैं . मौनी अमावस्या पर सारे देश में हिन्दू लोग जहाँ दिन भर स्नान , पूजा , दान दक्षिणा  आदि में व्यस्त रहते हैं , वहीँ काफी संख्या में लोग बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मौनव्रत रखते हैं .
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16 Dec 2009

Quotes

Author: swarnishadswar | Filed under: Music Quotes

Where there is music there can be no harm.

-Spanish Proverb

16 Dec 2009

Quotes

Author: swarnishadswar | Filed under: Music Quotes

इच्छाशक्ति

इच्छा ही मानव में मुख्य प्रेरक शक्ति है . यदि मानव में किसी चीज को पाने की इच्छा बलवती हो तो वह उसे  प्राप्त कर ही लेता है   .इच्छाशक्ति से ही उन्नति होने की सम्भावना है . प्रबल इच्छा होने से उसी के अनुरूप प्रयत्न होंगे और पुरुषार्थ तथा प्रयत्न योग्य रीति से होने से सिद्धि भी प्राप्त होगी . इसलिए मन से सदा शुभ इच्छा ही धारण करनी चाहिए .

राजेंद्र श्रीवास्तव

1 Sep 2009

Music Quotes

Author: swarnishadswar | Filed under: Music Quotes

संवेदनशील हुए बिना संगीत में महारत हासिल नहीं हो सकती . संगीत साधक को प्रकृति के प्रति ,पक्षियों के प्रति , धरती की सुन्दरता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए . संगीतकार में इतनी तो संवेदनशीलता तो होनी ही चाहिए की वह prakriti के साथ एकलय हो सके .

राजेंद्र श्रीवास्तव

12 May 2009

kabir Bhajan

Author: swarnishadswar | Filed under: Bhajan

कबीर भजन

झीनी- झीनी  बीनी चदरिया .
काहे कै ताना काहे कै भरनी , कौन तार से बीनी चदरिया .
इंगला-पिंगला ताना भरनी , सुसमन तार से बीनी चदरिया .
आठ कँवल दल चरखा डोले, पांच तत्त्व गुन तीनी चदरिया .
साईं को सियत मास दस लागे, ठोंक- ठोंक के बीनी चदरिया .
सो चादर सुर-नर-मुनि ओढीं , ओढी के मैली कीनी चदरिया .
दास कबीर जतन से ओढ़न, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया .