वन लगाओ धरा बचाओ
धरती को हरा-भरा बनाओ
न नाश करो इस धरा का
न नाश करो पशु- जगत का
वृक्ष लगाओ धरा सजाओ
धरती को हरा- भरा बनाओ
अपना भविष्य आप बचाओ
-तूलिका श्रीवास्तव
वन लगाओ धरा बचाओ
धरती को हरा-भरा बनाओ
न नाश करो इस धरा का
न नाश करो पशु- जगत का
वृक्ष लगाओ धरा सजाओ
धरती को हरा- भरा बनाओ
अपना भविष्य आप बचाओ
-तूलिका श्रीवास्तव
मैं खड़ा अकेला अनंत
मैं खड़ा अकेला अनंत
ढूँढ रहा जीवन का पथ
साथ नहीं कोई मेरे
खोज करता नित निरंतर
तय करता जीवन का पथ
तूलिका श्रीवास्तव
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बरसो कारे-कारे मेघा
बिन बरसे मत जा रे मेघा
अपनी शीतल बौछारों से
धरती की सब प्यास बुझा दे
बदरा देख नाचे मोर
पशु -पक्षी सब हुए विभोर
बरसो -बरसो जमकर मेघा
उमड़-घुमड़ बरसो रे मेघा
तूलिका श्रीवास्तव

मैं खड़ा अकेला अनंत
मैं खड़ा अकेला अनंत
खोज रहा नित निरंतर
उन चेहरों में कुछ
जो खोए हैं जो भूले हैं
सदियों से जो बिछुड़ चुके हैं
मैं खड़ा अकेला अनंत
खोज रहा नित निरंतर
हर चेहरों को जो
लगते हैं कुछ जाने पहचाने
तूलिका श्रीवास्तव
प्राचीन अनमोल वचन

मौन का रहस्य
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Where there is music there can be no harm.
-Spanish Proverb
इच्छाशक्ति
इच्छा ही मानव में मुख्य प्रेरक शक्ति है . यदि मानव में किसी चीज को पाने की इच्छा बलवती हो तो वह उसे प्राप्त कर ही लेता है .इच्छाशक्ति से ही उन्नति होने की सम्भावना है . प्रबल इच्छा होने से उसी के अनुरूप प्रयत्न होंगे और पुरुषार्थ तथा प्रयत्न योग्य रीति से होने से सिद्धि भी प्राप्त होगी . इसलिए मन से सदा शुभ इच्छा ही धारण करनी चाहिए .
राजेंद्र श्रीवास्तव
संवेदनशील हुए बिना संगीत में महारत हासिल नहीं हो सकती . संगीत साधक को प्रकृति के प्रति ,पक्षियों के प्रति , धरती की सुन्दरता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए . संगीतकार में इतनी तो संवेदनशीलता तो होनी ही चाहिए की वह prakriti के साथ एकलय हो सके .
राजेंद्र श्रीवास्तव

कबीर भजन
झीनी- झीनी बीनी चदरिया .
काहे कै ताना काहे कै भरनी , कौन तार से बीनी चदरिया .
इंगला-पिंगला ताना भरनी , सुसमन तार से बीनी चदरिया .
आठ कँवल दल चरखा डोले, पांच तत्त्व गुन तीनी चदरिया .
साईं को सियत मास दस लागे, ठोंक- ठोंक के बीनी चदरिया .
सो चादर सुर-नर-मुनि ओढीं , ओढी के मैली कीनी चदरिया .
दास कबीर जतन से ओढ़न, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया .